रख ले मुझको भी कान्हा, शरण में तेरी ,

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज - ले तो आया हो हमको सपनो के गांव में

रख ले मुझको भी कान्हा, शरण में तेरी ,

रख ले मुझको भी कान्हा, शरण में तेरी ,

सेवा में अपनी, लगा ले जरा ,

सेवा में अपनी, लगा ले जरा ,

जैसा तू चाहे वैसा, करुँगी श्रृंगार मैं ,

अपने हाथो से तुझे, करुँगी तैयार मैं ,

क्या हैं पसंद, तुझको मोहन, तू बता दे जरा ,

सेवा में अपनी, लगा ले जरा ,

सेवा में अपनी, लगा ले जरा ,

जैसा तू चाहे वैसा ,भोजन बनाऊ ,

अपने हाथो से कान्हा, तुझको खिलाऊ,

क्या हैं पसंद, तुझको मोहन, तू बता दे जरा ,

सेवा में अपनी, लगा ले जरा ,

सेवा में अपनी ,लगा ले जरा ,

जैसा तू चाहे वैसा , भजन सुनाऊ,

भजनों से कान्हा मैं, तुझको रिझाऊ ,

क्या हैं पसंद, तुझको मोहन, तू बता दे जरा ,

सेवा में अपनी लगा ले जरा ,

सेवा में अपनी लगा ले जरा ,

जैसा तू चाहे वैसा, फूल मंगाऊ ,

फूलो से कान्हा मैं, तुझको सजाऊ ,

क्या हैं पसंद, तुझको मोहन, तू बता दे जरा ,

सेवा में अपनी लगा ले जरा ,

सेवा में अपनी लगा ले जरा ,

Bhajan Lyrics - Jay Prakash Verma, Indore

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।