मै हू शरण मे तेरी संसार के रचैया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मै हू शरण मे तेरी संसार के रचैया कश्ती मेरी

लगादो उस पार ओ कन्हैया

मेरी अरदास सून लीजे प्रभू सूध आन कर लीजै

दरस एकबार तो दीजै मौ समझूंगा श्याम रीझे

पतवार थाम लो तूम मजधार मे है नैया, मै हू शरण...

भक्त बेचैन हूं तूम बीन तरसते नैन है तूम बीन

अंधेरी रैन है तूम बीन कही ना चैन है तूम बीन

है उदास देखो तूम बीन गोपी ग्वाल, मै हू शरण...

दयानीधी नाम है तेरा कहाते हो अन्तर्यामी

समाये हो चराचर मे सकल संसार के स्वामी

नमामी नमामी हरदम बृजधाम के बसैया, मै हू शरण...

तेरी यादो का मनमोहन ये दिल मे उमड़ा है सावन

बूझेगी प्यास इस दिल की सूनूंगा जब तेरा आवन

पावन पतीत हूं करना जगदीश ओ कन्हैया, मै हू शरण...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।