किवे मुखड़े तो नजरा हटावा

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॥ पावन पाठ ॥

किवे मुखड़े तो नजरा हटावा अजे दिल एहे रजिया नही,

दिल कहे साईंया तेनु तकी जावा अजे दिल एहे रजिया नही

दिसदा रब सच्चा जदों तेनु वेखिये,

दिल ठण्ड पेंदी दाता जदों मथा तेकिये,

पल पल तेरा शुकर मनावा,

अजे दिल एहे रजिया नही..................

वखरा रूप तेरा वख तेरी शान वे,

दिल साडा सदके वे जींद कुर्बान वे,

वे मैं वारी वारी बलहारी जावा ,

अजे दिल एहे रजिया नही..................

छड के भरोसे इसे उम्मीद लई,

दुनिया तो मुख मोड़ा एक तेरी दीद लई,

किवे जन्मा दी प्यास भुजावा,

अजे दिल एहे रजिया नही..................

अखियाँ एहे तक तक ढुल ढुल पेंदियाँ,

वक़्त एहे रुक जावे साहिल एहे कहन्दियाँ,

खुद वेखा नाल सब नु वेखावा,

अजे दिल एहे रजिया नही..................

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।