नर से नारी बने भोलेनाथ

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नर से नारी बने भोलेनाथ

नर से नारी, बने, भोले नाथ,

गौरां, कहने लगी ॥

कहने, लगी गौरां, कहने लगी ॥

नर से नारी, बने, भोले नाथ...

गले, में नाग, लिपट रहे काले ॥

मारे, अंदर, से फुँकार,

गौरां, कहने लगी ।

नर से नारी, बने, भोले नाथ...

कहाँ, छुपाओगे, गंगा की धारा ॥

बहती, बहती, जटा से धार,

गौरां, कहने लगी ।

नर से नारी, बने, भोले नाथ...

गले में, पहने, मुंडों की माला ॥

कैसे, पहनोगे, मोतियन के हार,

गौरां, कहने लगी ।

नर से नारी, बने, भोले नाथ...

जटा, जूट सी, कैसे छुपेगी ॥

सब, उलझ, रहे हैं वाल,

गौरां, कहने लगी ।

नर से नारी, बने, भोले नाथ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।