थक गई मेरी बड़ी,

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़-: जिंदगी की ना टूटे लड़ी

थक गई मेरी अखियां बड़ी,

तूं क्या जाने मै कब से खड़ी

ना थमीं आंसुओं की लड़ी,तू क्या जाने मैं

कब से खड़ी

थक गई....

केले के छिलके तक खा गया,

झूठे बेरों को भी पा गया

जाने उसमें वह क्या बात थी,

चल के कुब्जा के घर आ गया

तुमको मेरी गली ना मिली,तू

क्या जाने मैं कब से खड़ी

थक गई मेरी अखियां बड़ी,

तूं क्या जाने मैं कब से खड़ी

ना थमीं आंसुओं की लड़ी,

तू क्या जाने मैं कब से खड़ी

थक गई....

लाज द्रोपती की राखी कभी,बुआ कुंती के कष्ट हरे

अर्जुन का बना सारथी,उतरा उत्तरा के गर्भ में

जा परीक्षित की रक्षा करी,तुमको मेरी गली ना मिली

थक गई मेरी अखियां बड़ी,तूं क्या जाने मैं कब से खड़ी

ना थमीं आंसुओं की लड़ी,तू क्या जाने मैं कब से खड़ी

थक गई....

हुई आठों पहर बावरी,कुछ ना सूझे किधर जाऊ में

एक झलक मुझको दिखला भी दो,इससे पहले कि मर जाऊं मैं

जाए जीवन की बीती घड़ी,श्री हरिदासी उदासी बड़ी

थक गई मेरी अखियां बड़ी,तूं क्या जाने मैं कब से खड़ी

ना थमीं आंसुओं की लड़ी,तू क्या जाने मैं कब से खड़ी

थक गई....

सब पे करुणा बरसती रही,एक मैं ही तरसती रही

एक ना एक दिन सुनेगी तुझे,मन ही मन में सिसकती रही

अब ना दूरी ये जाए सही,तू क्या जाने मैं कब से खड़ी

थक गई मेरी अखियां बड़ी,तूं क्या जाने मैं कब से खड़ी

ना थमीं आंसुओं की लड़ी,तू क्या जाने मैं कब से खड़ी

थक गई....

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।