जग भोगों में मैं तो उलझ गई रे

सुभाष सिंह राजपूत जी ।
श्री राम भजन विविध भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

पिङ्गला गणिका का गीत : जग भोगों में मैं तो उलझ गई रे ।

जग भोगों में मैं तो उलझ गई रे ।

भजन बिनु रामा विगड़ गई रे ॥

बड़े दुःख की है बात, इन्द्रियों से हार गई ।

झूठे पुरुषों में मैं, सच्चा पुरुष बिसार गई ॥

लोभी अरु लम्पटों ने, तन को इस खरीद लिया ।

हाय रति सुख व धन की, चाह बावरी ने किया ।

विषय भोग से मैं तो जड़ भयी रे ।

भजन बिनु रामा...

तन एक घर है, अस्थियों के खंभे बाँस लगे ।

चाम रोएँ नखों से, खूब इसकी छत्त सजे ॥

नौ दरवाजे जिसमें, गंदगी निकले ही सदा ।

ऐसे तन पर भी कैसे, हो गई मैं मुर्ख फिदा ॥

जीवन मुक्तों में मैं पिछड़ गई रे ।

भजन बिनु रामा...

मेरे मूरख तू चित्त, आज ये बतला दे सही ।

कभी विषयों से कोई, तृप्त हुआ है भी कहीं ॥

प्रीति भोगों से किये, देवता-मनुष्य जभी ।

काल के गाल में, पड़के कराहते है तभी ॥

बुरे कर्म में ही उमर गई रे ।

भजन बिनु रामा...

जीव जगकूप में, विषयान्ध गिरता आश रहा ।

उस पर भी काल सर्प, मुख में अपने ग्रास रहा ॥

आज मैं धन्य हुई, आश सभी टूट गई ।

कान्त प्रभु की कृपा से, भोग जग की छूट गई ॥

अधम पिंगला भी बदल गई रे ।

भजन बिनु रामा...

भजन रचना : प.पू.गुरुदेव श्री श्रीकान्त दास जी महाराज ।

स्वर : सुभाष सिंह राजपूत जी ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।