आँसू भरी ब्रज की सखियों की राहें

सुभाष सिंह राजपूत जी ।
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

विरह गीत : आँसू भरी ब्रज की सखियों की राहें ।

आँसू भरी व्रज की सखियों की राहें ।

कोई कह दे कान्हा हमें भूल जायें ॥

हमको भूलाकर गया छोड़कर वो ।

नाता परम प्रेम का तोड़कर वो ॥

ऐसे कन्हैया से क्यों दिल लगायें ।कोई...

हम गोपियों की अजब दास्तां है ।

जहाँ गम के बादल हैं वो आसमां है ।

विरह आँसुओं से भरी व्रज की राहें ॥कोई...

इन आँसुओं में है दुःख का समन्दर ।

न जाने मिलेगा तू कब श्यामसुन्दर ॥

तुम्हें प्यारी नगरी हमें कान्त आहें ।कोई...

भजन रचना : प. पू. संत श्री श्रीकान्त दास जी महाराज ।

स्वर : सुभाष सिंह राजपूत जी ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।