शंकर से कह दो कर ले श्रंगार

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

शंकर से कह दो कर ले श्रंगार

शंकर, से कह दो, कर ले श्रंगार,

गौरां, पहनाएगी, फूलों के हार ॥

गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥

शंकर के, सिर का, क्या है श्रृंगार ।

जूड़ा, जटाएं और, गंगा की धार ॥

गंगा, लहराती है, भोले नाथ जी ।

गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥

शंकर के, माथे का, क्या है श्रृंगार ।

चंदन, लगाए और, चंदा उजियार ॥

चंदा, से उजाला है, भोले नाथ जी ।

गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥

शंकर, के गले का, क्या है श्रृंगार ।

बिच्छू, ततैया और, सपों के हार ॥

सर्प, लहराते हैं, भोले नाथ जी ।

गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥

शंकर, के हाथों का, क्या है श्रंगार ।

त्रिशूल, कमण्डल और डमरू की तान ॥

तान, मस्तानी है, भोले नाथ जी ।

गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥

शंकर, के पैरों का, क्या है श्रंगार ।

धुल, खड़ाऊँ और, मस्तानी चाल ॥

चाल, मस्तानी है, भोले नाथ जी ।

गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥

शंकर, के अंगों का, क्या है श्रंगार ।

बाघंबर, शाला और, भस्मी आपार ॥

रूप, मस्ताना है, भोले नाथ जी ।

गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥

शंकर, से कह दो, कर ले श्रंगार,

गौरां, पहनाएगी, फूलों के हार ॥

गौरां, तो दीवानी है, भोले नाथ की ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।