तेरी जटा में गंगा की धारा

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोलेनाथ तेरी महिमा निराली,

तेरी जटा में गंगा की धारा।

नीलकंठ तेरी छवि है प्यारी,

तू ही है जगत का सहारा।

जय शिव शंकर, जय महाकाल,

तेरा डमरू बजाए, हर ताल।

हर हर महादेव, शंभू दयालु,

तू ही है काल का भी काल।

कैलाश पे तेरा आसन है प्यारा,

संग तेरे विराजे माँ गौरा।

भभूत रमाए, मृगछाला पहने,

तू है सबसे भोला, ओ न्यारा।

विष का प्याला तूने पी लिया,

देवताओं का संकट हर लिया।

जय शिव शंकर, जय महाकाल,

तेरा डमरू बजाए, हर ताल।

हर हर महादेव, शंभू दयालु,

तू ही है काल का भी काल।

सोमवार को जो करे तेरी पूजा,

उसकी हर मुराद हो पूरी।

तेरी भक्ति से जीवन संवरता,

मिट जाती हर मजबूरी।

तेरा नाम जपे जो प्राणी,

उसकी होती नैया पार।

भोलेनाथ तेरी महिमा निराली,

तेरी जटा में गंगा की धारा।

नीलकंठ तेरी छवि है प्यारी,

तू ही है जगत का सहारा।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।