रामलला आरती

पारंपरिक
श्री राम आरती राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

श्री रामलला की मंगलमय है आरती।

प्राणियों के जीवन को संवारतीं॥

श्री रामलला की मंगलमय है आरती।

प्राणियों के जीवन को संवारतीं॥

भक्तों के प्राण कौशल्या लाल

ये अवधपुरी के राजा, ये विष्णु के अवतारा

हरि यही हरिहर भी यही, इन चरणों की आरती।

प्राणियों के जीवन को संवारतीं॥

श्री रामलला की मंगलमय है आरती।

प्राणियों के जीवन को संवारतीं॥

भूमि का भार हरने को राम, साकेत धाम से आए, हरि राम रूप में आए।

बजरंग बली के प्राण यही, उस प्राणपुंज की आरती।

प्राणियों के जीवन को संवारतीं॥

श्री रामलला की मंगलमय है आरती।

प्राणियों के जीवन को संवारतीं॥

भारत का मान रखने को राम,

एक बार तो फिर से आओ,

फिर सत्य सनातन लाओ

हम सबका तो आधार यही,

उस परमपिता की आरती।

प्राणियों के जीवन को संवारतीं॥

श्री रामलला की मंगलमय है आरती।

प्राणियों के जीवन को संवारतीं॥

लेखक,गायक- पंडित मनोज नागर

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।