चुन्नी माई दी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

रंग दे ललारीया रंग दे ओ-2

रंग दे लुलारीया लाल चुनरी माई दी,

चुन्नी मां दे गल जा पाऊनी जिसदी महिमा गाई दो,

रंग दे लुलारीया लाल चुनरी माई दी।

लाल मन्दिर विच डेरा लाया, लाल ही चौला मां ने पाया,

लालां दी गल पाके माला, सुन्दर माँ ने भवन सजाया,

लाल ही ज्योती जग-मग जगदी, सब दे मन नू भाई दी,

रंग दे लुलारीया लाल चुनरी माई दी।

लाल हत्थां ते रंगली मैहंदी, लालां दे दुखड़े मां संहदी,

लाल ही टीका मसत बिराजे, लाल ही चूड़ा बाहीं पांऊदी,

लाल ही माला गल विच पाई, शेरा वाली माई दी,

रंग दे लुलारीया लाल चुनरी माई दी।

लाल ही चौले भगतां पाये, लाल ही परने बन-बन आये,

लाल ही मत्थे तिलक लगाये, लाल ही अट्टे गल विच पाये,

लाल ही झण्डे लै के आये, रल-मिल रौनक लाई दी,

रंग दे लुलारीया लाल चुनरी माई दी।

लाल ही रंग विच चुन्नी रंगदे, सागर मां तो खैरां मंगदै,

लाल फूलां दी फुलवाड़ी विच, भोली मां दे दर्शन करदे,

लाल तेरे सत-पापी वरगे, रज-रज मीहमा गाई दी,

रंग दे लुलारीया लाल चुनरी माई दी।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।