फूलों में सज रहे हैं,अवध धाम के दुलारे

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

फूलों में सज रहे हैं,अवध धाम के दुलारे

और साथ सज रही हैं,सीया मिथलैश दुलारी

फूलों में...

चुंन-चुंन के फुल जिसने,तेरे महल को है सजाया

उन हाथों पे मैं सदके,उन हाथों पे मैं वारी

फूलों में सज रहे हैं,अवध धाम के दुलारे

और साथ सज रही हैं,सीया मिथलैश दुलारी

फूलों में...

श्रृगांर तेरा प्यारे,शोभा कहुं मैं इसकी

इत है अवध दुलारा,उत मिथलैश दुलारी

फूलों में सज रहे हैं,अवध धाम के दुलारे

और साथ सज रही हैं,सीया मिथलैश दुलारी

फूलों में...

नीलम से सोहे रघुवर,स्वर्णं सी सोहे सीया जी

इत कौशल्या का प्यारा,उत है जनक दुलारी

फूलों में सज रहे हैं,अवध धाम के दुलारे

और साथ सज रही हैं,सीया मिथलैश दुलारी

फूलों में...

बईयां गले में डाले,जब दोनों मुस्कुराते

सबको ही प्यारे लगते,मामा के मन भाते

फूलों में सज रहे हैं,अवध धाम के दुलारे

और साथ सज रही हैं,सीया मिथलैश दुलारी

फूलों में...

रसिक पागल मामा पानीपत

संपर्कंसुत्र-9991515880

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।