तुम्हें हम चाहतीं इतना मगर तुम छोड़ जाते हो

सुभाष सिंह राजपूत जी ।
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

गोपी विरह गीत : तुम्हें हम चाहतीं इतना मगर तुम छोड़ जाते हो ।

भजन रचना : प. पू. श्री श्रीकान्त दास जी महाराज ।

स्वर : सुभाष सिंह राजपूत जी ।

तुम्हें हम चाहतीं इतना, मगर तुम छोड़ जाते हो ।

बढ़ाये प्रेम जिस दिल में, उसी को तोड़ जाते हैं ॥

बतायें किस तरह तुमको, तुम्हें हम चाहतीं कितना ?

तरस जाते मेरे नैना, मगर मुख मोड़ जाते हो ॥

तुम्हें...

सुनेगा कौन दुख मेरा ? तुम्ही बस एक अपने हो ।

मगर तुम भी हमें तजकर, कहाँ ? किस ओर जाते हो ॥

तुम्हें...

बता दे आज सच मोहन, मेरा क्या प्रेम झूठा था ।

कान्त यदि सच नहीं यह तो, हमें क्यों छोड़ जाते हो ॥

तुम्हें...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।