सत्संग तो वगैर मेरा मन न लगे

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन विविध भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

सत्संग तो वगैर मेरा मन न लगे

सत्संग तो वगैर, मेरा मन न लगे ।

हरि, नाम तो वगैर, मेरा दिल न लगे ।

हो, मन न लगे, मेरा, दिल न लगे ॥

सत्संग तो... जय हो ॥।वगैर...

बागों, के फ़ूल, बागों में खिले, बागों में खिले ॥

मेरे, मन वाला... जय हो ॥।फ़ूल, सतसंग में खिले ।

सत्संग तो वगैर, मेरा मन न लगे...

मंदिर, की ज्योत, मंदिर में जले, मंदिर में जले ॥

मेरे, मन वाली... जय हो ॥।सतसंग में जले ।

सत्संग तो वगैर, मेरा मन न लगे...

कागज़, की पतंग, डोरी से उड़े, डोरी से उड़े ॥

मेरे, मन की... जय हो ॥।पतंग, सतसंग से उड़े ।

सत्संग तो वगैर, मेरा मन न लगे...

कपड़े, की मैल, साबुन से धुले, साबुन से धुले ॥

मेरे, मन वाली... जय हो ॥।मैल, सतसंग में धुले ।

सत्संग तो वगैर, मेरा मन न लगे...

लक्क्ड़ी, की नाव, पानी में चले, पानी में चले ॥

मेरे, मन वाली... जय हो ॥।नाव, सतसंग में चले ।

सत्संग तो वगैर, मेरा मन न लगे...

जंगल, का मोर, जंगल में नाचे, जंगल में नाचे ॥

मेरे, मन वाला... जय हो ॥।मोर, सतसंग में नाचे ।

सत्संग तो वगैर, मेरा मन न लगे...

दुनियाँ, वाली रेल, पटड़ी पे चले, पटड़ी पे चले ॥

मेरे, मन वाली... जय हो ॥।रेल, सत्संग में चले ।

सत्संग तो वगैर, मेरा मन न लगे...

दुनियाँ, के हीरे, बाजारों में मिले, बाजारों में मिले ॥

मेरे, मन वाला... जय हो ॥।हीरा, सतसंग में मिले ।

सत्संग तो वगैर, मेरा मन न लगे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।