वृषभानु नन्दिनी जगत वन्दिनी

प्रवीण सिंह जी ।
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधा रानी से भावपूर्ण प्रार्थना :

वृषभानुनन्दिनी जगत वन्दिनी

वृषभानु नन्दिनी जगत वन्दिनी,

तुम दया की खान हो ।

मम हिय में भर दो प्रेमभक्ति,

तुम तो भक्ति ज्ञान हो ॥

प्रभु भक्ति की तू है मूरत,

तू है माँ ममतामयी ।

कृपा रूपी तू है सागर,

मातु तू करुणामयी ॥

हे राधिके ले श्याम को संग,

मुझे दर्शन दीजिये ।

सब दुर्गुणों से दूर करके,

पार भव से कीजिये ॥

जगत रूपी नाव की,

जननी तुम्हीं पतवार हो ।

कोई न भव से पार करता,

मातु खेवनहार हो ॥

कर कृपा रख हाथ सिर पर,

चरण रज अब दीजिये ।

कान्त है माँ पुत्र तेरा,

शरण इसको लीजिये ॥

दोहा :

है अबोध बालक तेरा,

रखना माता ध्यान ।

ले शरण में कान्त को,

कर दे माँ कल्यान ॥1 ॥

कृपा करो हे राधिके,

भरो प्रेम की रंग ।

एकबार मोहि दरश दे,

श्री मनमोहन के संग ॥2 ॥

दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।

स्वर : प्रवीण सिंह जी ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।