बधैया बाजे गोकुल में

विप्र अमित सारस्वत जी ।
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

नन्दोत्सव : बधैया बाजे गोकुल में

देखो जनम लियो नन्दलाल - गोपाल,

बधैया बाजे गोकुल में ।

सब हुए मस्त खुशहाल-खुशहाल,

बधैया बाजे गोकुल में ॥

नन्द के घर में खुशियाँ छायी ।

सज-धज के गापियाँ भी आयीं ॥

अब बरसे रंग गुलाल-गुलाल,

बधैया बाजे गोकुल में ।

देखो जनम लियो...

गीत खुशी के चहुँ दिशि छायो ।

नन्द के घर में लाला आयो ॥

अब छायो खुशी बहार-बहार,

बधैया बाजे गोकुल में ।

देखो जनम लियो...

माखन की अब कीच मची है ।

खुशियों की अब धूम मची है ॥

विप्रों को कान्त मिले दान-गोदान,

बधैया बाजे गोकुल में ।

देखो जनम लियो...

दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।

स्वर : विप्र अमित सारस्वत जी ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।