नर से नारी बने जब भोलेनाथ जी

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

नर से नारी बने जब भोलेनाथ जी

नर से, नारी बने, जब भोलेनाथ जी ।

रूप उनका, बनाना, गज़ब हो गया ।

चुपके चुपके से, निधिवन, महारास में ।

भोले बाबा का, जाना, गज़ब हो गया ॥

लाल साड़ी, चमकती, पहन रात में ।

और बालों की, लट को, संभाले हुए ।

माथे बिंदी, और चूड़ी, सजी हाथ में ।

नाक सोने की, नथनी को, डाले हुए ।

उल्टे पल्लू का, घूंघट, निकाले हुए ।

उसे चेहरा, छुपाना, गज़ब हो गया...

नर से, नारी बने, जब भोलेनाथ...

होंठ लाली, कमर में, है तगड़ी कसी ।

आंख कज़रारी, कारी, लगे हमनशी ।

ऐसी सूरत, सुहानी, लगे शम्भु की ।

जिसने देखी, उसी के, है मन में बसी ।

मोहिनी मूरत, मेरे दिल में, है वस गई ।

रूप शिव का, बसाना, गज़ब हो गया...

नर से, नारी बने, जब भोलेनाथ...

छोटे छोटे से, कदमों से, चलने लगे ।

आज, पड़ी डगरिया, गोकुल धाम की ।

देख मोहिनी, अदा लोग, हो गए फ़िदा ।

बल खाती, कमरिया, भोले नाथ की ।

आज, पहुंचे हैं नगरी, श्री श्याम की ।

पहुंच कर, मुस्कुराना, गज़ब हो गया...

नर से, नारी बने, जब भोलेनाथ...

हुई शुरुआत, जैसे, महाँ रास की ।

धुन मुरली की, पर भोले, थिरकने लगे ।

भूले सुध बुध, ही अपनी, भोले नाथ जी ।

फिर, सर से, है साड़ी, सरकने लगी ।

आंख, मोहन की, तब कुछ, फड़कने लगी ।

फिर वहां, पकड़े जाना, गज़ब हो गया...

नर से, नारी बने, जब भोलेनाथ...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।