भोले दे व्याह दे विच

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

भोले दे विआह दे विच

मैं तां, भोले दे, विआह दे विच ॥

तीन लोक का, राजा भोला, गौरां, एक लोक की रानी ॥

दोनों की, देखो कितनी, अज़ब है, प्रेम कहानी ।

आज देखो, दोनी की... आज शादी, हो रही है... ।

हम सबको, चलना है...

मैं तां, भोले दे, विआह दे विच, नचणा ए ॥।

नचणा ए, मैं नचणा ए ।

नच नच, नचणा, ख़ुशी मनौणा ॥

ख़ुशी, मनौणा, शगुन भी पौणा ॥

कई वर्षों की, करके तपस्या, गौरां ने, शंकर पाया ।

सारे देवी, देवताओँ ने, मिलके, जश्न मनाया ॥

अब देखो, गौरां की... जय माला, हो रही है... ।

हम, सबको चलना है,

मैं तां, भोले दे, विआह दे विच, नचणा ए ॥।

नचणा ए, मैं नचणा ए ।

नच नच, नचणा, ख़ुशी मनौणा ॥

ख़ुशी, मनौणा, शगुन भी पौणा ॥

देवोँ के संग, भूतों की टोली, सब का, खिल गया चेहरा ।

जब करके, बैल सवारी आया, भोला, बाँध के सेहरा ॥

मंडप में, दोनों के... अब फ़ेरे, हो रहे हैं... ।

हम, सबको चलना है...

मैं तां, भोले दे, विआह दे विच, नचणा ए ॥।

नचणा ए, मैं नचणा ए ।

नच नच, नचणा, ख़ुशी मनौणा ॥

ख़ुशी, मनौणा, शगुन भी पौणा ॥

आओ, मिल के सारे, ख़ुशी मनाईए, दिन यह, फिर नहीं औणा ।

स्वर्ग दा, सब तों, सोहणा जोड़ा, होर, कोई नहीं होणा ॥

अब शिव और, शक्ति की... हाँ जी, शादी हो गई है... ।

गीत, पुनीत यह लिखदा ए...

मैं तां, भोले दे, विआह दे विच, नचणा ए ॥।

नचणा ए, मैं नचणा ए ।

नच नच, नचणा, ख़ुशी मनौणा ॥

ख़ुशी, मनौणा, शगुन भी पौणा ॥

नचणा ए, मैं नचणा ए ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।