गुरसामल के आंगणिये में बाजे रे पैंजनिया देखो ठुमक ठुमक कैसी लटक मटक चालै नारायणी

पारंपरिक
विष्णु भगवान भजन रानी सती दादी भजन vishnu
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज : कौन दिशा में ले के

गुरसामल के आंगणिये में

बाजे रे पैंजनिया

देखो ठुमक ठुमक

कैसी लटक मटक

चालै नारायणी.. नारायणी

छम छम करती बाजै पैंजनिया, सब को मनड़ो हर्षावै

गुरसामल जी लेवै बलैयां, नजर कोई ना लग ज्यावै

रंग रंगीली.. गुड़िया छबीली..

बलिहारी जाऊं.. खुशियां मनाऊं..

ज्यूं लक्ष्मी की अवतार है

डगमग डगमग हालै.. देखो मोरणी सी चालै

देखो ठुमक ठुमक

कैसी लटक मटक

चालै नारायणी.. नारायणी

महलां में चालै अंगणा में चालै, घूघरिया खुड़कावती

ऐसी छवि कोई बड़भागी पावै, सोया भाग्य जगावती

जय हो नारायणी.. गूंज उठी वाणी

देवता भी बोली जयकार है

अम्बरीष कहवै.. बजता रहवै..

भग्तां कै पैंजनिया

देखो ठुमक ठुमक

कैसी लटक मटक

चालै नारायणी.. नारायणी

Lyrics अम्बरीष कुमार

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।