कब से तुम्हें पुकारूं फरियाद सुन ले मेरी

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

भजन :- कब से तुम्हें पुकारूं

कब से तुम्हें पुकारूं फरियाद सुन ले मेरी

मोहन् तु जल्दी आना कहीं हो न जाए देरी

दर दर भटक रहा था दुनिया का मैं सताया

न चैन न मुहब्बत मेरे नसीब आया

दीनो की सुनने वाले मुझको तलाश तेरी...मोहन तु

मेरे आंसुओं का दरिया कोई नही सहारा

डोले यह मेरी नैया मिलतां नही किनारा

अब आ के तुम बचा लो डूबी यह कश्ती मेरी...मोहन तु

इस पार रह सका न उस पार जा मैं पाया

मुझको मिली न मंजिल तब शरण तेरी आया

रस्ता मुझे दिखा दो अंधियारी राहें मेरी...मोहन तु

कब तक सताओगे तुम एक बार प्यारे आ जा

देखो सजी है महफिल रौनक तो अब बढ़ा जा

चेहरा ज़रा दिखा जा प्यासी है आंखें मेरी...मोहन तु

कर दो नजर दया की उपकार मुझ पे प्यारे

तोड़ो यह मोह के बंधन बक्शो गुनाह सारे

इस "श्याम" को बना लो चरणों की रज की ढेरी...मोहन तु

लेखक सुरेश सूद श्याम

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।