तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़-किसी नज़र को तेरा इंतज़ार आज भी है

तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ

जब भी चाहा जिसे चाहा,तेरे प्रेम का तलबगार हुआ

तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ

तेरे सिवा...

ज़माने भर की ठोकरें,ख़ात्ते रहते हैं

तेरे ही नाम की रटना,लगाये रहते हैं

जब भी चाहा जिसे चाहा तेरे प्रेम का तलबगार हुआ

तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ

तेरे सिवा...

हां‌ प्रेम है मुझे तुझसें,ये मैंनें माना है

ना रह सकुंगा तेरे बिन,ऐसा लगता है

जब भी चाहा जिसे चाहा,तेरे प्रेम का तलबगार हुआ

तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ

तेरे सिवा...

नाम रसका पागल हुं मैं,कहे ज़माना मुझे

धसका माया में है फंसा,आके छुड़ाओ मुझे

जब भी चाहा जिसे चाहा,तेरे प्रेम का तलबगार हुआ

तेरे सिवा जहां में,कौंन मददगार हुआ

तेरे सिवा...

बाबा धसका पागल पानीपत

संपर्कंसुत्र-7206526000

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।