ओम जय जय गोमाता

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

ओम ! जय जय गोमाता, मैया जय जय गोमाता ।

पाप शाप दुःख हरणीं, सुखों की दाता ।।

क्षीरसिन्धु मंथन से, प्रगटी जो गैया ।।

कामधेनूं वहीं नंदा, वही सुरभि मैया-जय०

रुद्रमात, वसुपुत्री, बहनां अदितिनंदनां ।।

उसी गोवंश गोधन की, कर रहा जग वन्दना- जय०

अखिल विश्व की पालक, फल चारों दायिनी ।।

आयु ओज बढ़ावे, रस अमृत खानी-जय०

सुर नर रिषि मुनि पूजित, गौ पूजित धाता ।।

गोसेवा गोदर्श से, भव भय टर जाता- जय०

धर्म कर्म की नैया, गौ अति हितकारी ।।

गोबर दूध गोमूत्र, औषधि गुणकारी-जय०

जीवनधन गोमाता, गौ सम्मान करो ।।

गो-गोविन्द गोपाला, का गुणगान करो-जय०

जहां गोवध गोहत्या, दुःख वहां वास करें ।।

जहां गोसदन गोशाला, देव निवास करें - जय०

कर गोसेवा पूजा, आरती जो गावे ।।

कहे मधुप गो सहारे, भवजल तर जावे- जय०

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।