छम छम करती आओ मारी मैया सातों बहना आओ जी

पारंपरिक
महादेव भजन दुर्गा भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

दोहा :- सातों बहणा माईजी थारी महिमा जग में न्यारी

रूप सुहाणों लागें री मारी जगदंबा महारानी

छम छम करती आओ म्हारी मैया सातों बहना आओ जी,

एक हाथ में त्रिशूल राखे एक हाथ तलवारियां जी,

ओ थारी सूरत प्यारी लागे माई थारी सूरत प्यारी जी,

छम छम करती आओ म्हारी मैया सातों बहना ला रा जी

इंदरगढ़ सु मां बिजासन मैया आओ आप जी

भगत खड़ा छः थारे आंगने दर्शन देवो मैया जी

प्यारी घणी लागे मारी मईया प्यारी घणी लागे री

छम छम करती आओ म्हारी मैया छम छम करती आओ जी

ओ रामगढ़ सु रामाबाई मैया आप आओ जी

रामगढ़ की महारानी म्हाने प्यारी घणी लागे री

ऊंचो पर्वत धाम निरालो माई शोभा घणी प्यारी जी

छम छम करती आओ मेरी मैया रामगढ़ से आओ जी

डूंगरपुर सु लाल बाईं चौथ भवानी लारा लाओ जी

डूंगरपुर से लाल बाईं चौथ भवानी लारा लाओ री

छम छम करती आओ मारी मैया म्हारे आंगने आओ जी

ओ कैला देवी पंचम मैया धाम करौली से आओ जी

भगत करें अरदास विनती म्हारे घरां भी आओ जी

धाम करौली से कैला मैया म्हारे आंगने आओ जी

आया नौरता 9 दिन का मां म्हारे आंगने आओ जी

छम छम करती आओ म्हारी मैया प्यारी घणी लागे री

ओ करणी संग गुलाब बाई देशनोक से आओ जी

करणी संग गुलाब बाई बीकानेर से आओ जी

सातों बहणा लारा रहवे घणी रुपाली लागे जी

सातों बहणा आओ म्हारी मैया सातों बहना आओ जी

छम-छम करती आओ सातु बहना म्हारे आंगने आओ जी

ओ..छम-छम करती आओ म्हारी मैया दुधियाखेडी आओ जी

छम-छम करती आवे दुधियाखेडी माई घणी तो प्यारी लागे जी

कोटा माही धाम बनायो घणी सोवणीं लागे जी

छम छम करती आवे दुधियाखेड़ी मां घणी रुपाली लागे जी

छम-छम करती आओ लाल बाईं गांव लबान से आओ जी

छम-छम करती आओ महारानी गांव लबान से आओ जी

लाल चुनरिया ओढ़ भवानी हाथ तलवारा लाओ जी

लाल चुनरिया ओढ़ भवानी म्हारे आंगने आओ जी

छम-छम करती आओ लाल बाईं मैया म्हारे आंगने आओ जी

छम-छम करती आओ मैया ब्राह्मणी जी लाओ जी

छम-छम करती आओ मैया ब्राह्मणी मां आओ जी

म्हारे आंगने आओ मैया जी ब्राह्मणी मां आओ जी

छम-छम करती आयी ब्राह्मणी मां म्हाने प्यारी लागे जी

गांव खिंण्यां सु आओ मैया कंकाली मां आओ जी

छम छम करती आओ कंकाली मैया गांव खिंण्यां से आओ जी

गांव खिंण्यां से आवे म्हारी मैया चितौड़गढ़ से आओ री

बैगी-बैगी आओं म्हारी मैया गांव खिंण्यां के माईने

छम छम करती आओ म्हारी मैया कालका महारानी जी

बोल श्री जगदम्बे मैया की

भजन गायक / लेखक - हेमन्त सैनी इंदरगढ़

सम्पर्क करे - 9511552408

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इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।