राधा श्री राधा-धुन

पूनम यादव
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

राधा, श्री राधा, श्री राधा,

श्री, राधा राधा ॥

राधा, श्री राधा, श्री रा...धा,

राधा, राधा श्री राधा ॥

राधा, श्री राधा, श्री राधा,

श्री, राधा राधा ॥

राधा, श्री राधा, श्री रा...धा,

राधा, राधा श्री राधा ॥

राधा, श्री राधा, राधा श्री राधा ।

राधा, श्री राधा भजो, राधा श्री राधा ।

राधा, श्री राधा भजो, राधा श्री राधा ॥

राधा, श्री राधा भजो, राधा श्री राधा ॥

राधा, श्री राधा, राधा श्री राधा ।

राधा, श्री राधा भजो, राधा श्री राधा ॥

राधा, श्री राधा भजो, राधा श्री राधा ॥

राधा, श्री राधा भजो, राधा श्री राधा ॥

राधा, रधा, रा...धा ॥

श्री, राधा, राधा, रा...धा ॥

हो, राधा, रधा, रा...धा ॥

राधा, श्री राधा भजो, राधा श्री राधा ॥

राधा, श्री राधा, श्री राधा, राधा, राधा श्री राधा

हो राधा, राधा राधा... ( राधा ) ॥

श्री राधा, राधा राधा... ( राधा ) ॥

हो राधा, राधा राधा... ( राधा ) ॥

वृन्दावन, वाली राधा... ( राधा ) ॥

गहवर वन, वाली राधा... ( राधा ) ॥

गोवर्धन, वाली राधा... ( राधा ) ॥

राधा, फुल वाली राधा... ( राधा ) ॥

ओ श्यामा ,प्यारी राधा... ( राधा ) ॥

ओ मेरी, प्यारी राधा... ( राधा ) ॥

राधा, श्री राधा, श्री रा...धा,

राधा, राधा श्री राधा ॥

ओ पर्म, सयानी राधा... ( राधा ) ॥

प्रिय मन, भावनी राधा... ( राधा ) ॥

प्रिय मन, मोहिनी राधा... ( राधा ) ॥

ओ प्यारी, प्यारी राधा... ( राधा ) ॥

ओ नव, नवेली राधा... ( राधा ) ॥

अनुराग, सुहेली राधा... ( राधा ) ॥

कृष्ण, शिरोमणि राधा... ( राधा ) ॥

बृष भानु, दुलारी राधा... ( राधा ) ॥

बरसाने, वाली राधा... ( राधा ) ॥

ओ राधा, राधा राधा... ( राधा ) ॥

ओ पूर्ण, कामा राधा... ( राधा ) ॥

रामा, अवि रामा राधा... ( राधा ) ॥

राधा, श्री राधा, श्री रा...धा,

राधा, राधा श्री राधा ॥

वृन्दावन, रानी राधा... ( राधा ) ॥

मोहन मन, मानी राधा... ( राधा ) ॥

चंद, चकोरी राधा... ( राधा ) ॥

बृष भानु, किशोरी राधा... ( राधा ) ॥

गोपी, चूड़ा मणि राधा... ( राधा ) ॥

ओ रूप, सनातन राधा... ( राधा ) ॥

राधा, श्री राधा, श्री रा...धा,

राधा, राधा श्री राधा ॥

जय जय, श्री रा...धे ॥

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।