मेरे महादेव सारा ब्रह्माण्ड समेटे हैं

पारंपरिक
श्री गणेश भजन शिव भजन ganesh
॥ पावन पाठ ॥

माथे चन्द्रमा और गले में नाग लपेटे हैं

मेरे महादेव सारा ब्रह्माण्ड समेटे हैं

तन की जानें मन की जानें जानें चित्त की चोरी

उनसे कुछ भी छुपा नहीं उनके हाथ है सबकी डोरी

हाथ है सबकी डोरी उनके हाथ है सबकी डोरी

गजानन और षडानन जी जिनके बेटे हैं

वो महादेव सारा ब्रह्माण्ड समेटे हैं

मेरे महादेव सारा ब्रह्माण्ड समेटे हैं

कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्

सदा बसन्तं हृदयारविन्दे भवं भवानीसहितं नमामि

तन पे भस्म रमाये भोला जटा में गंगा विराजे

हाथों में डमरू त्रिशूल है कानों में कुण्डल साजे

कानों में कुण्डल साजे उनके कानों में कुण्डल साजे

अपने तन पर सिंह की वो खाल लपेटे हैं

मेरे महादेव सारा ब्रह्माण्ड समेटे हैं

माथे चन्द्रमा और गले में नाग लपेटे हैं

मेरे महादेव सारा ब्रह्माण्ड समेटे हैं

ॐ नमः शिवाय शम्भू ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय शम्भू ॐ नमः शिवाय

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।