जा जा रे छलिया कान्हा तू बड़ा चोर है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

जा जा रे छलिया कान्हा तू बड़ा चोर है ।

तू बड़ा चोर है और बरजोर है ॥

प्रेम जो करेगा तुझसे, वो धोखा खायेगा ।

घर परिवार सब कुछ लुट जायेगा ॥

तू है लुटेरा कान्हा और चितचोर है ।

जा जा रे छलिया कान्हा तू बड़ा चोर है ॥

रूप को दिखाया जिसको, वो तेरा हो गया ।

तेरे नाम का दिवाना, बावरा वो हो गया ॥

होश ही नहीं है उसकों, कहाँ ? किस ओर है ?

जा जा रे छलिया कान्हा तू बड़ा चोर है ॥

नजरों से लूटता और, बंशी की तान से ।

टेढ़ी-मेढ़ी चाल और, लूटे मुस्कान से ॥

लीला कथा से लूटा, कान्त विभोर है ।

जा जा रे छलिया कान्हा तू बड़ा चोर है ॥

भजन रचना एवं स्वर-संगीत :

दासानुदास श्रीकान्त दास जी महाराज ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।