नौ दिन काहे आई हो मैया मोरी

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नौ दिन काहे आई हो मैया मोरी, रुक जाना इस बार

ओ मैया मोरी अखियां प्यासी रे, भवानी मोरी अखियां प्यासी रे

भीड़ अजब लगी मैया की दुवरिया

आस भरे दो नयन लिए मां है,

विनती करें तोरे द्वार,

मैया मोरी अखियां प्यासी रे...

भगत खड़े तेरी राह निहारे

दरस दिखा जा मैया कब से पुकारे मां

क्या तुझको माँ सुध नहीं मेरी

सुन लो कारण पुकार,

मैया मोरी अखियां प्यासी रे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।