मन की बगीया मैं आई

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन गुरुदेव भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मन की बगियाँ में आई बहार, गुरु के जब दर्शन हुये,

मेरे चेहरे पे आया निखार, गुरु के जब दर्शन हुए,

फुला नही आज में हु समाता, अपने गुरु के में बलिहारी जाता,

लगा बजने उसी का नी सार ,गुरु के जब दर्शन हुए

मेरे चेहरे पे.............

नर रूप मैं मैंने भगवान पाया,भगती का मैने है वरदान पाया

बरसै रिमघिम दया कि फ़ुहार, गुरु के जब दर्शन हुए

मेरै चेहरे पे........

दुःखों के सागर में मैं तो फसा था, दुःखों के दल दल में मे तो फ़सा था

हर मुश्किल गई मुझ से हार, गुरु के जब दरसन हुए

मेरै चेहरे पे आया........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।