मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना भूल जाने के काबिल नहीं है

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है

चोट खायी है जो मैंने दिल में, वो दिखने के काबिल नहीं है

जबसे देखा है जलवा तुम्हारा, कोई आँखों को जचता नहीं है

यूं तो देखे है बहुत नूर वाले, सारे आलम में तुमसा नहीं है

मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है

तेरी सूरत पे क़ुर्बान जाऊ, तेरी आँखे है या मय के प्याले

जिनको नज़रो से तुमने पिलाई, होश आने के काबिल नहीं है

मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है

मैंने पूछा की अब कब मिलोगे, पहले मुस्काये फिर हंस के बोले

सबके दिल में समाये हुए है, आने जाने के काबिल नहीं है

मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना, भूल जाने के काबिल नहीं है

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।