प्रभु नाम में क्या बंदिश

पारंपरिक
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॥ पावन पाठ ॥

प्रभु नाम में क्या बंदिश, दिन रात लीजिए,

ताली बजा बजा कर, शुरुआत कीजिये,

प्रभु नाम मे क्या बंदिश, दिन रात लीजिए...

औरो के पास जाने से, क्या होगा फायदा,

चरणों में प्रेम अश्रु की, बरसात कीजिये,

ताली बजा बजा कर, शुरुआत कीजिये,

प्रभु नाम मे क्या बंदिश...

करने से पहले से काम तू, सौ बार दिल से पूछ,

हरगिज ना कभी दिल से, कुछ घात कीजिये,

ताली बजा बजा कर, शुरुआत कीजिये,

प्रभु नाम मे क्या बंदिश...

मीरा ने पी के दुनिया को, हाला दिखा दिया,

प्रभु नाम रस का प्याला, दिन रात पीजिये,

ताली बजा बजा कर, शुरुआत कीजिये,

प्रभु नाम मे क्या बंदिश...

मिलने से जिनसे आप पर, गन्दा असर पड़े,

हरगिज ना ऐसे लोगो से, मुलाकात कीजिये,

ताली बजा बजा कर, शुरुआत कीजिये,

प्रभु नाम मे क्या बंदिश...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।