मेरी लगी शिव संग प्रीत

पारंपरिक
महादेव भजन कृष्ण भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

मेरी लगी शिव संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने।

क्या जाने कोई, क्या जाने, क्या जाने कोई, क्या जाने।

मुझे मिल गए कैलाश के नाथ, ये दुनिया क्या जाने।

हो मेरी लगी शिव संग प्रीत, ये दुनिया क्या जाने।

चढ़ने लगी मन शिव की जब से,

भाई बावरी मैं तो तब से।

बाँधे प्रेम के डोर महादेव से,

नाता तोड़ा मैंने जग से।

ये कैसी अमर प्रीत,

ये दुनिया क्या जाने।

मेरी लगी शिव संग प्रीत,

ये दुनिया क्या जाने।

भोलेनाथ का सुंदर रूपवा,

मन में बस गया शिव शंकर नाथवा।

लोग कहें मैं भाई बावरिया,

जब से ओढ़ी शिव की चदरिया।

मैंने छोड़ी जग की रीत,

ये दुनिया क्या जाने।

मेरी लगी शिव संग प्रीत,

ये दुनिया क्या जाने।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय।

हर हर महादेव, हर हर महादेव।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।