जलती रहे शेरों वाली जोत तेरी जलती रहे

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

जलती रहे, शेरों वाली, जोत तेरी जलती रहे ।

जलती रहे, ज्वाला माई, जोत तेरी जलती रहे ।

जलती रहे माँ, जलती रहे, जलती रहे महाँ माई,

जोत, तेरी जलती रहे ।

किसने मईया तेरा भवन बनाया ।

भवन बनाया मईया, भवन बनाया ।

किसने चवर ढूलाया, जोत तेरी जलती रहे...

जलती रहे...

भक्तों ने मईया तेरा भवन बनाया ।

भवन बनाया मईया, भवन बनाया ।

सेवक चवर ढूलाया, जोत तेरी जलती रहे ।

जलती रहे...

सूहा सूहा चोला मईया अंग विराजे ।

अंग विराजे मईया, अंग विराजे ।

केसर तिलक लगाया, जोत तेरी जलती रहे ।

जलती रहे...

धूप दीप फल ध्वजा नारियल ।

ध्वजा नारियल मईया, ध्वजा नारियल ।

तेरी भेंट चढ़ाया, जोत तेरी जलती रहे ।

जलती रहे...

छप्पन भोग चौरासी व्यंजन ।

चौरासी व्यंजन मईया, चौरासी व्यंजन ।

तेरे भोग लगाया, जोत तेरी जलती रहे ।

जलती रहे...

दूर दूर से यात्री आवे ।

यात्री आवे मईया यात्री आवे ।

आकर शीश निवाया, जोत तेरी जलती रहे ।

जलती रहे...

ब्रह्मा वेद पढ़े तेरे द्वारे ।

तेरे द्वारे मईया तेरे द्वारे ।

शँकर ध्यान लगाया, जोत तेरी जलती रहे ।

जलती रहे...

ऊँचे पहाड़ों मईया वास तुम्हारा ।

वास तुम्हारा मईया, वास तुम्हारा ।

नीचे शहर वसाया, जोत तेरी जलती रहे ।

जलती रहे...

आए हुए का मईया संकट काटो ।

संकट काटो मईया, संकट काटो ।

ख़ुशी मनाता जाए, जोत तेरी जलती रहे ।

जलती रहे...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।