घर घर अष्टमी दी जोत जगी ए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

घर घर अष्टमी दी जोत जगी ए ।

कंजका भवानी पूजा होंण लगी ए ॥

सज गए बाज़ार, सजीयां ने गलियां।

वस रहे रंग रस, फुल कलियां ॥

अमृत दी वर्षा होंण लगी ए -

कंजका भवानी...

घर घर कंजकां जयकार बोलया ।

माता दे प्यारेयां द्वार खोलया ॥

हर पासे दर्शनां दी होड़ लगी ए -

कंजका भवानी...

मथे ते तिलक, गलां विच अट्टे ने ।

पैरां 'च' पायल, सिरां ते दुपट्टे ने ॥

बांही चूड़ा हथां उत्ते मैंहदी लगी ए -

कंजका भवानी...

रखना 'मधुप' कंजकां नूं याद जी ।

कंजकां तो लैनां है आर्शीवाद जी ॥

कंजकां दी बड़ी उच्ची शांन हुंदी ए -

कंजका भवानी...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।