ऊंचे पर्वत पे मैया

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

ऊंचे पर्वत पे मैया का भवन बड़ा है प्यारा .

इन आंखों में न समाए इतना सुंदर अजब नजारा..

बड़ा सुंदर अजब नजारा... जय जय माँ ,जय जय माँ.

हरी भरी सुंदर वादी में माँ ने लगाया डेरा है.

हर पर्वत हिम से शोभित,हर राह में रंग बिखेरा है..

इन राहों पे भक्ति भाव से बोले सब जैकारा..

इन आंखों में न समाये इतना सुंदर अजब नजारा.

बड़ा सुंदर अजब नजारा.. जय जय माँ.जय जय मां

दूर दूर से दर्शन करने जो मैया के आते हैं.

अपने जीवन में अपनी मंज़िल को वो पा जाते हैं..

ये मैया तो सबकी मइया

सब को पार उतारा।

इन आंखों में न समाये इतना सुंदर अजब नजारा।

बड़ा सुंदर अजब नजारा... जय जय मां जय जय माँ..

ऊँचे पर्वत पे मैया का भवन बड़ा है प्यारा .

इन आंखों में न समाये इतना सुन्दर अजब नजारा

बड़ा सुन्दर अजब नजारा.

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।