कण कण में है मईया

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन दुर्गा भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कण कण में है मईया

कण, कण में है मईया,

हर, क्षण में है मईया ॥

तूने, दुनियाँ रचाई, मेरी मईया है,

तूने, पार लगाई, सबकी नईया है ॥

कण, कण में है मईया, हर, क्षण में है...

जैसे, वेदों में पुराण, वैसे, गीता में है ज्ञान ॥

हर, सांस में, समाई मेरी मईया है,

तूने, पार लगाई, सबकी नईया है ॥

कण, कण में है मईया, हर, क्षण में है...

जैसे, राधा में है श्याम, वैसे, हनुमत में है राम ॥

सारे, भगतों में, समाई मेरी मईया है,

तूने, पार लगाई, सबकी नईया है ॥

कण, कण में है मईया, हर, क्षण में है...

जैसे, तारों बीच चंदा, वैसे, नदियों बीच गंगा ॥

लहरों, लहरों में, समाई मेरी मईया है,

तूने, पार लगाई, सबकी नईया है ॥

कण, कण में है मईया, हर, क्षण में है...

जैसे, फूलों में है रंग, वैसे, कलियों में सुगंध ॥

पत्ते, पत्ते में, समाई मेरी मईया है,

तूने, पार लगाई, सबकी नईया है ॥

कण, कण में है मईया, हर, क्षण में है...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।