कलियुग के घोर अंधेरे में

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

कलियुग के घोर अंधेरे में-2 तेरी जगमग ज्योत जगे, चमके तेरा नूर ।

धरती अम्बर पाताल में भी,-2 तेरे नाम का डंका बजे, चमके तेरा नूर ।।

तर्ज: तेरी प्यारी-प्यारी सूरत को, किसी की नजर न लगे

मोहन मुरली वाला तू, भक्तों का रखवाला तू ।

भरी सभा में द्रुपद-सुता की, लाज बचने वाला तू ।।

अर्जुन के रथ को तू हांका-2 किया उसका दुखड़ा दूर, चमके तेरा नूर ।

कलियुग के घोर अंधेरे में, तेरी जगमग ज्योत जगे, चमके तेरा नूर ।

नरसी की हुंडी तारी तू, साँवलशाह गिरधारी तू ।

धुर्व प्रह्लाद की रक्षा की, और तारी मीरा बाई तू ।।

इक बार तो नजरे फेर इधर-2 और करदे दुखड़ा दूर, चमके तेरा नूर

कलियुग के घोर अंधेरे में, तेरी जगमग ज्योत जगे, चमके तेरा नूर ।

दर-दर का ठुकराया हूँ, प्रभु तेरी शरण मे आया हूँ ।

महिमा तेरी सुन सुनकर, चरणों मे शीश झुकाया हूँ ।।

प्रभु ले लो शरण मे तुम अपनी-2, मैं आया हो मजबूर, चमके तेरा नूर ।।

कलियुग के घोर अंधेरे में, तेरी जगमग ज्योत जगे, चमके तेरा नूर ।

पापी हूँ या कपटी हूँ, चाहे मैं नालायक हूँ ।

हांथ धरो मुझ पर मोहन, आखिर तेरा बालक हूँ ।।

तू जन्म-जन्म का साथी मेरा-2 नैनो से मत हो दूर, चमके तेरा नूर ।

कलियुग के घोर अंधेरे में, तेरी जगमग ज्योत जगे, चमके तेरा नूर ।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।