सब यही पड़ा रह जाएगा

पारंपरिक
श्री राम भजन राम भजन ram
॥ पावन पाठ ॥

सब यही पड़ा रह जाएगा

सब, यहीं, पड़ा, रह जाएगा,

हरि, राम, नाम, संग जाएगा ॥

सब यहीं, पड़ा, रह जाएगा ।

हरि राम, नाम, संग जाएगा ।

सब, यहीं, पड़ा, रह जाएगा...

चाहे, कितने भी, बाग़ लगा ले ॥

एक, पत्ता भी, संग, नहीं जाएगा,

हरि, राम, नाम, संग जाएगा ।

सब, यहीं, पड़ा, रह जाएगा...

चाहे, कितने भी, ताल खुदवा ले ॥

एक, बूंद, नहीं, ले जाएगा,

हरि, राम, नाम, संग जाएगा ।

सब, यहीं, पड़ा, रह जाएगा...

चाहे, कितने भी, महल बना ले ॥

एक, पत्थर भी, संग, नहीं जाएगा,

हरि, राम, नाम, संग जाएगा ।

सब, यहीं, पड़ा, रह जाएगा...

चाहे, कितनी भी, माया जोड़ लें ॥

एक, रूपया भी, संग, नहीं जाएगा,

हरि, राम, नाम, संग जाएगा ।

सब, यहीं, पड़ा, रह जाएगा...

चाहे, कितने भी, गहने बना ले ॥

एक, रत्ती भी, संग, नहीं जाएगा,

हरि, राम, नाम, संग जाएगा ।

सब, यहीं, पड़ा, रह जाएगा...

चाहे, कितनी भी, काया सँवार ले ॥

सब, मिट्टी, में ही, मिल जाएगा,

हरि, राम, नाम, संग जाएगा ।

सब, यहीं, पड़ा, रह जाएगा...

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।