काली गेल मशानी चाली

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

काली गेल मसाणी चाली खा के मीठा पान!

छोड़ दिए शमशान रात नै, छोड़ दिए शमशान!

चाली घूँट खून की भरके,

बैरी की छाती पाँ धरके,-2

अपने भगत के मोह में घिरके, पेड़े लागी खाण,

छोड़ दिए शमशान रात नै, छोड़ दिए शमशान!

किलकी मारै काली माई,

संकट तोड़ रह्या अंगडाई -2

आठम की तेरी करी कढ़ाई, लागी भोग लगाण,

छोड़ दिए शमशान रात नै छोड़ दिए शमशान!

घोर गात मह चढ़ण लागगी,

बैरी गेल्याँ लडण लागगी,-2

पेशी हट हट पडन लागगी, लिकडन लागी ज्यान

छोड़ दिए शमशान रात नै छोड़ दिए शमशान!

नीलम भगतनी तन्नै बुलावै,

माँ काली नै खूब खिलावै -2

मुकेश शर्मा उरलानिया, अशोक भगत की मान,

छोड़ दिए शमशान रात नै छोड़ दिए शमशान!

प्रेषक:

सिंगर सुनील धनुवंशी 98123-01662

हिसार हरियाणा -125001

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।