माँ दे नवराते गए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

नवराते आ गये माँ दें नवराते आ गये

नवराते आ गये माँ दें नवराते आ गये

सोना चोला माँ दे दर ते चड़ा माँ दें नवराते आ गये

नवराते आ गये

सोना लगे माँ नू चूड़ा वी चड़ा माँ दे नवराते आ गये -2

सोना चोला माँ दे सोना चोला माँ दे

सोना चोला माँ दे दर ते चड़ा माँ दें नवराते आ गये

सोना चोला माँ दे दर ते चड़ा माँ दें नवराते आ गये

सोन महीने रोनका लाईया भर भर गढ़िया संगता आईया

भर भर गढ़िया संगता आईया भर भर गढ़िया संगता आईया

लय के हथ मोड़ी लय के हथ मोड़ी

लय के हथ मोड़ी ध्वजा वे चड़ा माँ दें नवराते आ गये

नवराते आ गये सोना चोला माँ दे दर ते चड़ा माँ दें नवराते आ गये

जगमग जगदी जोत नुराली वैष्णो मैयाँ शेरवाली

वैष्णो मैयाँ शेरवाली वैष्णो मैयाँ शेरवाली

गोटे वाली चुन्नी गोटे वाली चुन्नी मैया नू चड़ा माँ दें नवराते आ गये

नवराते आ गये सोना चोला माँ दे दर ते चड़ा माँ दें नवराते आ गये

गगन मान माँ दर ते आवे भविष्य माँ तेरा दर्शन पावे

भविष्य माँ तेरा दर्शन पावे भविष्य माँ तेरा दर्शन पावे

गावे हाथ जोड़ गावे हाथ जोड़

गावे हाथ जोड़ चरनी खड़ा माँ दें नवराते आ गये

नवराते आ गये सोना चोला माँ दे दर ते चड़ा माँ दें नवराते आ गये

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।