चिन्तपूर्णी मेरे साथ हो

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

तेरे नाम से ही मेरा दिन हो

तेरे नाम से ही मेरी रात हो

मैं जब भी कदम बढ़ाऊँ चिंतपूर्णी मेरे साथ हो

छिन्मस्तिका फूला रानी बड़ी ही प्यारी लगती है

देखती जाऊँ मैया को मेरी आँखें भी ना थकती हैं

झोलियाँ भरती जाए मैया पूछे ना कभी जात वो

मैं जब भी कदम बढ़ाऊँ……

जब भी आँखें बंद करूँ माँ तेरा दर्शन पाऊँ मैं

इतना कर्म किया है मुझपे कैसे भूल ये जाऊँ मैं

डोलने कभी ना दे जब माँ के हाथ में मेरा हाथ हो

मैं जब भी कदम बढ़ाऊँ………

दूर कभी ना करना मैया हमको कभी भूलाना ना

अपनी दया का हाथ माँ मेरे सिर से कभी उठाना ना

डोर कभी नां टूटने देना जैसे भी हालात हों

मैं जब भी कदम बढ़ाऊँ……..

सारे जग ने चिन्तापूर्णी मुझको किया बेगाना है

ख़ुशी दीवानी नाम तेरे की पागल कहे जमाना है

किए रमन के अच्चे दिन माँ अब ना अँधेरी रात तो

मैं जब भी कदम बढ़ाऊँ…….

गायिका :-बावरी खुशी

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।