मैया दे नराते आगए

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

मैया दे नराते आगए

वजन वाजे ते ढोल शहनाईयां, मैया दे नराते आगए।

लाल लाल धजा लहिराईयां, मैया दे नराते आगए ।।

कंजक भवानी मां दे सुंदर दीदार ने,

मां ज्योतावली दे गूंजदे जयकार ने।

घर घर खेतियां लहरियां, मैया दे नराते आगए ।।

मंदिर मंदिर मां दा लगेया मेला ए,

मेला इह नरातेयां दा बड़ा अलबेला ए।

चा चढ़ेया खुशियां छाईयां, मैया दे नराते आगए।।

वस रहे रंग रस रौनकां ने भारीयां,

मां दीयां संगतां नूं चढ़ियां खुमारियां।

मां दे भगतां भजन भेंटां गाईयां, मैया दे नराते आगए ।।

दास 'मधुप' बाणे पैज मां निभांदी ए,

आस अरदास मैया सबदी पुचांदी ए।

सारा जग करदा वाडिआईयां, मैया दे नराते आगए ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।