चिंतपूर्णी दरबार - राजन राज

पारंपरिक
माता दुर्गा भजन दुर्गा भजन durga
॥ पावन पाठ ॥

चिंता जिथे दूर होवन सारे संसार दिया

क्या बाता ने चिंतपूर्णी माँ दे दरबार दिया

पिंडी रुपी शक्तियां सब भगता नु तारदियां

क्या बात ने ...

स्वर्गा तो भी सोहना चिंतपूर्णी माँ दा द्वारा

हर पल गूंजे इस दर उत्ते दाती दा जय कारा

सब पासे ने चर्चा माँ दी जय जय कार दिया

क्या बाता ने चिंतपूर्णी माँ दे..........

छिन्न मस्तिका मैया सबदे भरदि ऐ भंडारे

दीन दुखी जो दर ते आवे उस नु मैया तारे

की की सिफ्ता दस्सा मैया दे उपकार दिया

क्या बाता ने चिंतपूर्णी माँ दे..........

राजन वर्गे लखा मां दी महिमा लिख-लिख गाउँदे

जिंदगी मां दे लेखे ला के जीवन सफल बनाउँदै

माँ दे हाथ विच डोरा सब दे घर परिवार दिया

क्या बाता ने चिंतपूर्णी माँ दे..........

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।