लिदकोट वालेया मै तेनु पई धेयोनिआ

पारंपरिक
माँ गंगा आरती बाबा बालक नाथ भजन ganga
॥ पावन पाठ ॥

लिदकोट वालेया मै तेनु पई धेयोनिआ।।

विशाल नाथ पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

सतगुरु पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

गंगा जाल नाल तेरे चरण धुयावा मै

सोनिया खड़ावा तेरे पैरा विच पावा मै

आसान मै तेरा फुल्ल नाल सजोनिआ

विशाल नाथ पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

सतगुरु पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

चांदी दी थाली विच, जोत जगाके।।

चन्दन दा सतगुरु जी नू तिलक लगाक।।

फुल कालिया दे तेनू ,हार मै पहनादि।।

विशाल नाथ पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

सतगुरु पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

सोनिया जटावा वाला रूप बढ़ा फाबद।।

देख देख गुरा जी न दिल नाईयो रजदा।।

करके दीदार मूक जान परेशानिया

विशाल नाथ पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

सतगुरु पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

लीदकोट विच दुःख ,कटदे हरेक दे।।

नूरी नूरी आखा नाल जिदेवाल वेख दे।।

तइओ तेरी बानी सारी दुनिया दीवाणिआ

विशाल नाथ पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

सतगुरु पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

तन मन लाके जीने, आरती नू गाया ए

दिनिया दा हर सुख गुरा कोलो पाया ए

झूठी नयिओ गल ईहे गुरा दी जुबानी ए

विशाल नाथ पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

सतगुरु पीयारिया तेरी आरती गोनी आ।।

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।