तड़पती हुं विरह में श्याम

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तर्ज-अगर श्यामा जू ना होती

तड़पती हूँ विरह में श्याम, ना जानें कब मिलन होगा

इसी उम्मीद पे जीवन, मैंने सारा बिताया है

तड़पती हूँ...

पल पल नाम जिवाह पे, मन तेरे ध्यान में खोया

लगी है आग तन मन में, ना जाने कब मिलन होगा

तड़पती हूँ विरह में श्याम, ना जानें कब मिलन होगा

इसी उम्मीद पे जीवन, मैंने सारा बिताया है

कहाँ जाऊं करूँ मैं क्या, समझ मुझे कुछ ना आता है

दर्द इतना बड़ा दिल में, ना जानें कब मिलन होगा

तड़पती हूँ विरह में श्याम, ना जानें कब मिलन होगा

इसी उम्मीद पे जीवन, मैंने सारा बिताया है

ये मन रूप रसका पागल है, धसका है धस्सा जाता

आख़री सांस है मेरी, ना जानें कब मिलन होगा

तड़पती हूँ विरह में श्याम, ना जानें कब मिलन होगा

इसी उम्मीद पे जीवन, मैंने सारा बिताया है

बाबा धसका पागल पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।