तेरी गलियों का हु आशिक

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तेरी गलियों का हु आशिक तू एक नगीना है,

तेरी नजरो से सांवरे जाम पीना है,

तेरी गलियों का हु आशिक तू एक नगीना है,

मेरे हरदम मेरे साथी मेरे साथी हमदम,

तेरी ख़ुशी मेरी ख़ुशी तेरा गम मेरा गम,

तू लहु है तू जान है तू ही पसीना है,

तेरी गलियों का हु आशिक तू एक नगीना है,

तेरे सिवा कोई दूसरा नहीं मेरा,

छोड़ू नहीं कस के पकड़ा है ये दामन तेरा,

तू ही काशी तू ही बृंदावन तू ही बरसाना है,

तेरी गलियों का हु आशिक तू एक नगीना है,

तेरे बिना एक पल भी मैं जी नहीं सकता,

ये जुदाई के दर्द को मैं पी नहीं सकता,

तेरी गलियों में सांवरे मरना जीना है,

तेरी गलियों का मैं हु आशिक तू एक नगीना है

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HEMKANT JHA PYASA

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।