गुरु ज्ञान कई गेले पडिया

पारंपरिक
अन्य भजन गुरुदेव भजन bhajan
॥ पावन पाठ ॥

सुण मारा मनवा सांची कड़ियां!

गुरु ज्ञान कई गेले पाडिया!!

गुरु ज्ञान की संकरी सेरिया !

वॉ सेरिया में कोईक बडिया!!

हजारा में हरो मती भाई!

लाख में कहीं दौड़ चढ़िया !!

खाबो छावे लड्डू और पेड़ा !

रद के आडा ताला जुड़िया!!

पच पच मरिया मनक मोकला !

धरती पे कई जनम धरियां !!

आठ फेर समदा रेवे !

प्यासा कई मगरमंच पडिया!!

नहीं तोप तलवारा बाजी !

आणि धार कोई सुरा लडिया!!

फेरिया तू तो निर्भय साधु!

खर धर खैरा खम्भ खड़िया!!

भजन गायक – चम्पा लाल प्रजापति

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।