हुंण नहीं जाणां बरसाना छडके बाहर लाडली

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

तरज़- सोणें लगदे ने मैनूं ते हार वे श्यामा

हुंण नहीं जाणां बरसाना,छडके बाहर लाडली

मैं मर जाणां बरसाना,छडके बाहर लाडली

रखलो रखलो बरसाना,इस बार लाडली

हुंण नहीं....

मन विषेयां विकारां विच डोलदा,बिन‌

बुलाया ना राधे राधे बोलदा

ऐ नहीं डरदा जद करदा ऐ,अहंकार लाडली

मैं मर जाणां बरसाना,छडके बाहर लाडली

हुंण नहीं जाणां बरसाना,छडके बाहर लाडली

हुंण नहीं....

जग वैख़या मैं ठौक वजाके,गल मुकदी ऐ पैसेयां ते आके

सारे झुठे ऐ मतलब दा,संसार लाडली

मैं मर जांणा बरसाना छडके बाहर लाडली

हुंण नहीं....

नाम आम्रित पिलाईयो रस घोलके,मैं वी

मारूंगी चिकां दिल खोलके

जल्दी आईयो नहीं होन्दां,इन्तजार लाडली

मैं मर जांणा बरसाना,छडके बाहर लाडली

हुंण नहीं....

मेरी मुक गई जमानें वाली क़ैद वे,मैंनूं

मिल गये ने दिल वाले वैद वे

श्री हरिदासी कई जन्मां दी,बिमार लाडली

मैं मर जाणां बरसाना,छडके बाहर लाडली

हुंण नहीं जाणां बरसाना,छडके बाहर लाडली

हुंण नहीं....

बाबा धसका पागल पानीपत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।