परीक्षा कब तक लोगे नाथ

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन खाटू श्याम भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

अंधियारे में कहो कौन थामेगा मेरा हाथ।

बहुत हो चुका और परीक्षा कब तक लोगे नाथ।

चलता हूं तो कांटों पर ही चलना पड़ता है।

हर पल हर दम अंगारों में जलना पड़ता है।

रोज मुसीबत नया रूप धरकर आ जाती है,

रोज नए सांचे में मुझको ढलना पड़ता है।

बोलो कब तक ऐसे ही सहने होंगे आघात।

बहुत हो चुका और परीक्षा कब तक लोगे नाथ।

सच के पथ पर चला हमेशा तेरा ध्यान लगाया।

पर लगता है जैसे तूने मुझको कहीं भुलाया।

तेरी शरण छोड़कर बाबा बता कहां मैं जाऊं?

दुख का बादल मेरे सिर पर क्यों इतना गहराया।

कब तक और भटकना होगा मुझको दिन और रात

बहुत हो चुका और परीक्षा कब तक लोगे नाथ।

सहते-सहते संकट अब तो टूट चुकी है आस।

करुणा कर दो करुणासागर हार चुका है दास।

भक्त अगर मुश्किल में हो तो आते है भगवान,

तुम न सुनोगे तो बतलाओ कौन सुने अरदास।

तुमसे कहां छुपे हैं बाबा मेरे ये हालात।

बहुत हो चुका और परीक्षा कब तक लोगे नाथ।

© गौरव गर्वित

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।