हिमाली पाखैमा

पारंपरिक
महादेव भजन शिव भजन shiv
॥ पावन पाठ ॥

हिमाली पाखैमा -2

जाउँ है सबै भोले के साथैमा -2

बैकुण्ठका विष्णु आए ब्रह्मलोकका ब्रह्म-2

हामी पनि सँगै जाउँ भेला भई जम्मा-2

हिमाली पाखैमा -2

जाउँ है सबै भोले के साथैमा -2

स्वर्गबाट इन्द्र आए यमलोकका यम -2

नन्दी भृङ्गी नाच्न थाले सबै छम छम-2

हिमाली पाखैमा -2

जाउँ है सबै भोले के साथैमा -2

लौन हेर कति राम्रा हाम्रा शंकर भोले -2

शिव शिव भन्दै हिँड्छन् डोली बोक्ने डोले-2

हिमाली पाखैमा -2

जाउँ है सबै भोले के साथैमा -2

हिमाली पाखैमा -2

जाउँ है सबै भोले के साथैमा -3

चक्रपाणि सापकोटा

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।