झूमो रे नाचो, गाओ रे मां यशोदा ने जायो नंदलाला

पारंपरिक
श्री कृष्ण भजन कृष्ण भजन krishna
॥ पावन पाठ ॥

झूमो रे नाचो, गाओ रे मां यशोदा ने जायो नंदलाला 2

सुंदर सलोना गोपाला मां यशोदा ने जायो नंदलाला

सारे बिरज में खुशियां है छाई झूम ,झूम गाऐं ब्रिज नारी रे

झूला पड़ो है नंद जी के अंगना झांकी की शोभा है न्यारी रे

अंगना सजा है 2बाजा बजा है 2आया है सस्ती का प्रतिपाला

मां यशोदा ने जायो नंदलाला,,,,,

मथुरा सजी है गोकुल सजा है, झूमे है चारों दिशाएं रे

उत्सव मनाओ आओ सखी आओ, लाला को झूला झुलाएं रे

दर्शन करेंगे झोली भरेंगे, झूमे है ब्रज का हर ग्वाला

मां यशोदा ने जायो नंदलाला,,,,,,

लाला की मैया , लेबै बलैया , नंद बाबा बांटैं मिठाई रे

देवों ने आके फूल बरसाए, कैसी यह लीला रचाई रे

बंसी बजाने, गउयें चराने, आया है मोर मुकुट वाला

मां यशोदा ने जायो नंदलाला,,,,,

भरत कुमार भारत

इस पावन रचना का पाठ कब और कैसे करना चाहिए? ▾
प्रातःकाल स्नान करके अथवा संध्याकाल में शांत चित्त होकर स्वच्छ आसन पर बैठकर पाठ करना परम फलदायी माना जाता है।
नित्य पाठ करने से क्या आध्यात्मिक लाभ होता है? ▾
नित्य भक्तिभाव से स्मरण व पाठ करने से मन में शांति, एकाग्रता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।